सन् 1933 में श्री सरस्वती संस्कृत स्नातक मण्डल की स्थापना पुज्यपाद आचार्य श्री विश्वनाथ शास्त्री ने की, जिनका आशिर्वाद सदैव स्नातक मण्डल के साथ रहा। स्नातक मण्डल का अपना एक संविधान है जिसका मुख्योद्देश्य सर्वथा महाविद्यालय की उन्नति के लिये जागरूक रहना है। स्नातक मंडल का एक व्यक्ति महाविद्यालय की प्रबन्ध समिति का सदस्य रहता है। स्नातक मण्डल का उद्देश्य है कि प्रबन्ध समिति की समय- समय पर आर्थिक सहायता तथा प्रचार- प्रसार(छात्रवृद्धि) में सदा तत्पर रहना है। स्नातक मण्डल का प्रथम सम्मेलन श्री 108 महाराज स्वामी त्रिवेणी पुरी जी महाराज की अध्यक्षता में हुआ था। स्नातक मण्डल ने विद्यालय के भवन, पुस्तकालय, छात्रावास, दुकानों आदि के निर्माण के लिये भरपूर आर्थिक सहायता की है। इसके अतिरिक्त वह विद्यालय की गतिविधियों में यथोचित सहायता करता रहता है।
ज्योतिषी वंशीधर जी से दिक्षा प्राप्त शिष्यों में से कुछ सक्रिय सदस्य भी इस संस्था में सोसाईटी के सदस्य हैं। इनके प्रधान व प्रतिनिधि डा. बी.के दत्त हैं।।